मणिपाल हॉस्पिटल ने किडनी रोगियों को जागरूकता एवं सहयोग के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए डायलिसिस पेशेंट समिट का आयोजन किया

उत्तराखंड(देहरादून),बुधवार 29 जुलाई 2026

क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) आज विश्वभर में सबसे तेज़ी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुकी है और देर से निदान तथा जागरूकता की कमी के कारण हज़ारों लोग आजीवन डायलिसिस पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। इसी उद्देश्य के साथ कि मरीजों को एक ही मंच पर समग्र जानकारी उपलब्ध कराई जा सके, मणिपाल हॉस्पिटल ने डायलिसिस पेशेंट समिट का आयोजन किया, जो मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी की एक विशेष पहल है। इस अनूठे मरीज-केंद्रित कार्यक्रम में ५० से अधिक डायलिसिस मरीजों, डायलिसिस की प्रतीक्षा कर रहे व्यक्तियों, किडनी प्रत्यारोपण प्राप्त कर चुके मरीजों तथा उनके देखभालकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य सीखने, संवाद और अनुभव साझा करने के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराना था। इस समिट का संचालन डॉ. अर्घ्य मजूमदार, एडवाइज़र एवं वरिष्ठ सलाहकार, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग तथा डॉ. उपल सेनगुप्ता, निदेशक एवं क्लिनिकल लीड, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग, मणिपाल हॉस्पिटल ढाकुरिया ने किया। कार्यक्रम में डॉ. बस्तब घोष, सलाहकार यूरोलॉजिस्ट की भी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद किडनी स्वास्थ्य विषय पर एक संवादात्मक पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने किडनी रोग से जुड़ी आम भ्रांतियों को दूर किया, समय पर निदान के महत्व पर ज़ोर दिया, डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण में हुई नवीनतम प्रगति पर चर्चा की तथा मरीजों को समय रहते चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए प्रेरित किया। सत्र में जीवनशैली में बदलाव, संतुलित पोषण तथा उपचार का नियमित पालन करने को भी क्रॉनिक किडनी डिजीज के प्रभावी प्रबंधन के प्रमुख आधार बताया गया।

मरीजों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डायटेटिक्स, फिजियोथेरेपी, मनोविज्ञान, डायलिसिस सेवाओं तथा पेरिटोनियल डायलिसिस की बहु-विषयक टीमों द्वारा विशेष इंटरैक्शन कियोस्क स्थापित किए गए। इन कियोस्क के माध्यम से प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं पर चर्चा की और अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप समग्र परामर्श प्राप्त किया। कार्यक्रम को और अधिक भावनात्मक एवं प्रेरणादायक बनाने के लिए एक निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें मरीजों ने अपने उपचार के दौरान संघर्ष, उम्मीद और दृढ़ संकल्प से भरी प्रेरक कहानियाँ साझा कीं। इस अवसर पर शांतनु चटर्जी, सुसांत गांगुली, पारस शर्मा, प्रोजेश कुमार घोष, मलोया तलापात्रा, सार्थक दास तथा डॉ. काबेरी चौधुरी को उनके साहस और दृढ़ता के सम्मान में उपस्थित चिकित्सकों द्वारा पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. अर्घ्य मजूमदार ने कहा, “क्रॉनिक किडनी डिजीज के लगातार बढ़ते बोझ को देखते हुए मरीजों में जागरूकता बढ़ाना और रोकथाम संबंधी प्रयासों को मजबूत करना आज बेहद आवश्यक है। जब कोई मरीज एंड-स्टेज रीनल डिजीज तक पहुँच जाता है, तो उसका जीवन अत्यंत कठिन हो जाता है और वह सामान्य रूप से कार्य करने में असमर्थ हो सकता है। डायलिसिस या रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा जीवन-परिवर्तनकारी सफर है, जो मरीजों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से प्रभावित करता है, साथ ही उन्हें जीवन को फिर से जीने का अवसर भी देता है। इस समिट के माध्यम से हमारा उद्देश्य ऐसा मंच तैयार करना था, जहाँ मरीज बिना किसी झिझक के विशेषज्ञों से अपने प्रश्न पूछ सकें, डॉक्टरों तथा एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें और यह समझ सकें कि समय पर एवं नियमित उपचार, उचित पोषण तथा चिकित्सकीय सलाह का पालन करके वे एक संतोषजनक, सार्थक और सफल जीवन जी सकते हैं तथा अपनी पूरी क्षमता हासिल कर सकते हैं।

डॉ. उपल सेनगुप्ता ने कहा, “भारत में हर वर्ष २ लाख से अधिक लोग एंड-स्टेज किडनी डिजीज से प्रभावित होते हैं। ऐसे में समय पर उपचार और किडनी प्रत्यारोपण के प्रति जागरूकता बढ़ाना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। जिन मरीजों के लिए किडनी प्रत्यारोपण उपयुक्त होता है, उनके लिए यह आजीवन डायलिसिस की तुलना में बेहतर दीर्घकालिक जीवन रक्षा और कहीं बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करता है। हालांकि, भ्रांतियाँ और जागरूकता की कमी के कारण कई मरीज समय पर सही निर्णय नहीं ले पाते। इस प्रकार की पहलों के माध्यम से हमारा उद्देश्य मरीजों को शिक्षित करना, मिथकों को दूर करना, किडनी प्रत्यारोपण को लेकर सार्थक और जानकारीपूर्ण संवाद को बढ़ावा देना तथा समय पर निदान एवं नियमित किडनी स्वास्थ्य जांच के महत्व को रेखांकित करना है।

समिट के दौरान अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा करते हुए, बैरकपुर के निवासी, ५२ वर्षीय सरकारी कर्मचारी एवं किडनी प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता श्री अरूप कुमार दास ने कहा, “जब वर्ष २००७ में मुझे किडनी फेल होने का पता चला, तो मेरी ज़िंदगी एक ही रात में बदल गई। मुझे लगा कि अब सब कुछ समाप्त हो गया है और मैं दोबारा काम नहीं कर पाऊँगा। इसके बाद मेरा डायलिसिस शुरू हुआ। लगभग एक वर्ष तक डायलिसिस कराने के बाद जून २००८ में मेरा किडनी प्रत्यारोपण हुआ। पिछले १८ वर्षों से मैं पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी रहा हूँ। मैं आज भी पूर्णकालिक रूप से कार्य कर रहा हूँ, अपने काम के सिलसिले में व्यापक यात्रा करता हूँ और अपने परिवार के साथ हर पल का आनंद लेता हूँ। कुछ वर्ष पहले मुझे पिता बनने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। अपने अनुभव से मैंने सीखा है कि यदि मरीज डॉक्टरों की सलाह का पूरी निष्ठा से पालन करे, अपने प्रियजनों का सहयोग मिले और विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल प्राप्त हो, तो किडनी प्रत्यारोपण वास्तव में जीवन को नई शुरुआत दे सकता है। मैं डॉ. अर्घ्य मजूमदार का अत्यंत आभारी हूँ, जिन्होंने मेरी पूरी यात्रा में मेरा साथ दिया और मुझे जीवन का दूसरा अवसर प्रदान किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता श्री प्रद्युम्न सिन्हा ने अपनी यात्रा साझा करते हुए कहा, “डॉ. उपल सेनगुप्ता से मिलने के बाद मैंने स्वयं को कभी मरीज महसूस नहीं किया, क्योंकि उन्होंने मुझे जीवन का दूसरा अवसर दिया। किडनी प्रत्यारोपण के बाद मैं सामान्य जीवन जी रहा हूँ, अपने पेशे का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहा हूँ और बड़ी सर्जरी के डर पर भी विजय प्राप्त कर चुका हूँ। इस कार्यक्रम के माध्यम से मणिपाल हॉस्पिटल ने लोगों को डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण से जुड़े भय को दूर करने के लिए जागरूक और सशक्त बनाया है, साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया है। मरीजों के लिए समय पर दवाइयाँ लेना और डॉक्टरों द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का नियमित रूप से पालन करना अत्यंत आवश्यक है।

अपने संबोधन में मणिपाल हॉस्पिटल ढाकुरिया के हॉस्पिटल डायरेक्टर श्री दिलीप कुमार रॉय ने कहा, “किडनी रोग का निदान केवल मरीज ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है। जहाँ डॉक्टर उपचार प्रदान करते हैं, वहीं सही जानकारी, भावनात्मक सहयोग और यह भरोसा कि मरीज अपनी इस यात्रा में अकेले नहीं हैं, उनके उपचार और मानसिक संबल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हैं। डायलिसिस पेशेंट समिट के माध्यम से हमारा उद्देश्य ऐसा मंच तैयार करना था, जहाँ मरीज सीख सकें, अपने अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे से प्रेरणा एवं हौसला प्राप्त कर सकें। मणिपाल हॉस्पिटल ढाकुरिया में हमारी प्रतिबद्धता केवल उत्कृष्ट चिकित्सकीय सेवाएँ प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हम अपने मरीजों के जीवन के हर चरण में उनके साथ खड़े रहने का प्रयास करते हैं, ताकि वे आशा, आत्मविश्वास और सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें।

समिट का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें मरीजों और उनके देखभालकर्ताओं को विशेषज्ञों से सीधे जुड़ने, मार्गदर्शन प्राप्त करने तथा अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला। इस अनूठी पहल के माध्यम से मणिपाल हॉस्पिटल ढाकुरिया ने किडनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर उपचार को प्रोत्साहित करने तथा मरीजों को अधिक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और बेहतर जीवन जीने के लिए सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया।

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