उत्तराखंड(देहरादून),बुधवार 18 फरवरी 2026
उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में बड़ा मील का पत्थर हासिल हुआ है। राज्य में अब तक 2 लाख 53 हजार महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं,जो ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दे रही हैं।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने मंगलवार शाम अपने शासकीय आवास पर ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठक की। बैठक में केंद्र एवं राज्य पोषित योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई और योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश दिए गए।
मंत्री ने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएसजी) के आजीविका संवर्धन पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि सामुदायिक संस्थाओं को एंटरप्राइज विकास की दिशा में प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्पादन,प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन को एकीकृत करके ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जाए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में कुल 57 हजार स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड प्रदान किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप अब तक 2 लाख 53 हजार महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं,जो ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दे रही हैं।
इसके अलावा,मंत्री ने पुरकुल गांव से लाईबेरी चौक तक प्रस्तावित रोप वे परियोजना की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में ग्राम्य विकास सचिव धीरज गर्ब्याल और आयुक्त अनुराधा पाल सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास योजनाओं का सही क्रियान्वयन न केवल महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करता है, बल्कि पूरे समाज की प्रगति और समृद्धि में योगदान देता है। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने और योजनाओं के अधिकतम लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
इस समीक्षा बैठक के बाद विभाग ने आगे की रणनीतियों पर भी चर्चा की,ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका कार्यक्रमों और महिला सशक्तिकरण परियोजनाओं का प्रभाव और व्यापक रूप से महसूस किया जा सके।